भारत में आजकल युवा 30+ उम्र में शादी क्यों कर रहे हैं? देर से शादी के फायदे जैसे आर्थिक स्थिरता, परिपक्व रिश्ता और नुकसान जैसे फर्टिलिटी समस्या, सामाजिक दबाव जानिए। 2026 के ट्रेंड्स में क्या सही है? पूरी जानकारी हिंदी में।
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भारत में देर से शादी करने की प्रथा: लाभ और हानियाँ
परिचय
भारत में आजकल लड़के और लड़कियाँ ज्यादा उम्र में शादी करना चाहते हैं। यह बदलाव पिछले कुछ दशकों में तेजी से आया है। पहले की पीढ़ी में शादी 18-22 साल की उम्र में आम थी, लेकिन अब शहरों में यह 25-30 साल या उससे ज्यादा हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023 में महिलाओं की शादी की औसत उम्र 22.9 साल हो गई है, जो 2019 में 22.1 साल थी। शहरों में यह 24.3 साल और गाँवों में 22.4 साल है। NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, बाल विवाह कम हो रहा है, लेकिन देर से शादी का ट्रेंड बढ़ रहा है, खासकर शिक्षित और कामकाजी युवाओं में।
यह प्रथा अच्छी भी है और बुरी भी। इसमें लाभ ज्यादा हैं, लेकिन हानियाँ भी गंभीर हैं। इस लेख में हम विस्तार से दोनों पक्षों पर बात करेंगे। सरल भाषा में समझाएंगे, ताकि हर कोई आसानी से समझ सके। हम आंकड़ों, उदाहरणों और वास्तविक जीवन की बातों से इसे मजबूत बनाएंगे।
देर से शादी क्यों हो रही है?
सबसे पहले कारण समझें। भारत में युवा अब पहले करियर बनाना चाहते हैं। लड़कियाँ कॉलेज, जॉब, MBA या अन्य कोर्स करती हैं। लड़के भी अच्छी नौकरी, प्रमोशन या बिजनेस स्थापित करने के बाद शादी सोचते हैं। महंगाई बहुत है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में घर का किराया, खाना, ट्रांसपोर्ट महंगा है। दोनों कमाए बिना परिवार चलाना मुश्किल है।
दूसरा कारण शिक्षा है। NFHS-5 में देखा गया कि ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़कियों की शादी देर से होती है। हायर एजुकेशन वाली महिलाओं में बाल विवाह सिर्फ 4% है, जबकि बिना पढ़ाई वाली में 48%।
तीसरा, सोशल मीडिया और पश्चिमी प्रभाव। युवा अब डेटिंग, लिव-इन या लंबे रिश्ते देखते हैं। सही पार्टनर मिलने तक इंतजार करते हैं। मैट्रिमोनियल ऐप्स जैसे शादी.कॉम, भारत मैट्रिमोनी पर लोग 28-32 साल की उम्र में प्रोफाइल बनाते हैं।
चौथा, महिलाओं का सशक्तिकरण। अब लड़कियाँ दहेज, घरेलू हिंसा या असमानता से डरती हैं। वे पहले आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं, ताकि शादी में मजबूत स्थिति हो।
ये कारण मिलकर देर से शादी को बढ़ावा दे रहे हैं। अब लाभ देखें।
देर से शादी के लाभ
व्यक्तिगत विकास और स्वतंत्रता कम उम्र में शादी करने पर जिम्मेदारियाँ जल्दी आ जाती हैं। बच्चे, घर, सास-ससुर की देखभाल। लेकिन 28-30 साल में शादी करने पर व्यक्ति खुद पर फोकस कर सकता है। ट्रैवल कर सकता है, नए शहर देख सकता है, हॉबीज जैसे गिटार बजाना, डांस, फिटनेस सीख सकता है। एक सर्वे में पाया गया कि देर से शादी करने वाले लोग ज्यादा खुश रहते हैं, क्योंकि वे जीवन जी चुके होते हैं।
उदाहरण: एक आईटी इंजीनियर लड़की 22 साल में शादी करती, तो शायद जॉब छोड़ देती। लेकिन 29 साल में शादी करती है, तो सीनियर पोस्ट पर पहुँच जाती है, अच्छी सैलरी मिलती है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
आर्थिक मजबूती शादी के बाद सबसे बड़ी समस्या पैसे की होती है। देर से शादी में दोनों पार्टनर अच्छी कमाई करते हैं। 2025 के ट्रेंड में देखें, तो देर से शादी करने वाले जोड़ों की औसत आय ज्यादा है। वे लोन लेकर घर खरीद सकते हैं, बच्चों को अच्छी स्कूलिंग दे सकते हैं, विदेश घूम सकते हैं।
भारत में महंगाई 6-8% सालाना है। अगर शादी 25 साल में होती है, तो बचत कम होती है। लेकिन 30 साल में, दोनों 8-10 साल की सैलरी बचा चुके होते हैं। इससे तलाक की दर भी कम होती है, क्योंकि आर्थिक तनाव कम होता है।
भावनात्मक और मानसिक परिपक्वता 20-22 साल में लोग इमोशनल होते हैं। छोटी-छोटी बात पर झगड़ा। लेकिन 28-32 साल में व्यक्ति समझदार होता है। वह समझता है कि रिश्ते में कम्प्रोमाइज जरूरी है। एक रिसर्च में पाया गया कि 21 साल या उसके बाद शादी करने वाली महिलाओं में डिप्रेशन कम होता है, और कॉग्निटिव हेल्थ बेहतर रहती है। पुरुषों में भी फायदा है।
देर से शादी में लोग पार्टनर को अच्छे से चुनते हैं। अरेंज्ड या लव, दोनों में समय मिलता है जानने का। गलत चुनाव कम होता है।
स्वास्थ्य और परिवार नियोजन देर से शादी से लोग कम बच्चे प्लान करते हैं। भारत में जनसंख्या नियंत्रण के लिए यह अच्छा है। महिलाएँ 25-30 साल में बच्चे पैदा करती हैं, तो स्वास्थ्य जोखिम कम। मेडिकल सुविधाएँ बेहतर हैं।
साथ ही, लोग फिटनेस पर ध्यान देते हैं। जिम, योग, डाइट। शादी के बाद भी ये आदतें बनी रहती हैं। देर से शादी करने वाले जोड़े ज्यादा हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाते हैं।
सामाजिक और लिंग समानता यह प्रथा महिलाओं को मजबूत बनाती है। पढ़ी-लिखी, कमाने वाली महिला दहेज या हिंसा से लड़ सकती है। पुरुष भी घर के काम में मदद करते हैं, क्योंकि दोनों काम करते हैं। इससे समाज में बदलाव आता है। छोटे परिवार, बेहतर शिक्षा, महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है।
बॉलीवुड में प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण जैसी महिलाएँ 30+ में शादी कीं और सफल हैं। सामान्य लोग भी आईटी, बैंकिंग, डॉक्टर जैसे क्षेत्र में यही करते हैं।
अब हानियाँ देखें, जो काफी गंभीर हैं।
देर से शादी की हानियाँ
जैविक और प्रजनन संबंधी समस्याएँ महिलाओं में फर्टिलिटी 30-35 साल के बाद तेजी से कम होती है। 35+ में प्रेग्नेंसी मुश्किल, मिसकैरेज का खतरा ज्यादा। IVF महंगा है (5-10 लाख प्रति साइकिल)। पुरुषों में भी स्पर्म क्वालिटी घटती है।
भारत में परिवार बड़ा होना महत्वपूर्ण है। देर से शादी से कई जोड़ों को बच्चे नहीं होते या एक ही बच्चा होता है। एक स्टडी में कहा गया कि 30+ उम्र में प्रेग्नेंसी से जेस्टेशनल डायबिटीज, हाई BP जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं।
सामाजिक और पारिवारिक दबाव भारतीय समाज में शादी को बहुत महत्व दिया जाता है। 28-30 साल में अगर शादी नहीं हुई, तो रिश्तेदार ताने मारते हैं – "उम्र निकल रही है", "बच्चे कब होंगे"। लड़कियों पर ज्यादा दबाव। ग्रामीण इलाकों में यह और ज्यादा। इससे डिप्रेशन, एंग्जायटी होती है।
माता-पिता चिंतित रहते हैं। कई परिवारों में रिश्ते टूट जाते हैं।
अकेलापन और भावनात्मक कमी कम उम्र में शादी से साथी जल्दी मिल जाता है। लेकिन देर से, व्यक्ति अकेला रहता है। दोस्त शादी कर लेते हैं, परिवार अलग। कोविड जैसी महामारी में अकेलापन बहुत दुख देता है।
मैट्रिमोनियल साइट्स पर प्रोफाइल देखते-देखते थकान हो जाती है। सही मैच नहीं मिलता।
परिवार संरचना और पीढ़ीगत अंतर देर से शादी से बच्चे देर से होते हैं। माता-पिता 40+ में बच्चे पैदा करते हैं, तो 60 साल में बच्चा 20 का होता है। समझ का फासला बढ़ता है। दादा-दादी की उम्र ज्यादा, देखभाल मुश्किल।
संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। छोटे परिवार, लेकिन भावनात्मक सपोर्ट कम।
स्वास्थ्य जोखिम बढ़ना उम्र के साथ बीमारियाँ जैसे शुगर, BP, हार्ट प्रॉब्लम आती हैं। शादी के बाद अगर स्वास्थ्य खराब, तो रिश्ता प्रभावित। महिलाओं में लेट प्रेग्नेंसी से कॉम्प्लिकेशन। पुरुषों में तनाव से यौन समस्याएँ।
सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव भारत की संस्कृति में शादी जल्दी होती है। देर से शादी से परंपराएँ कमजोर होती हैं। त्योहारों में परिवार छोटा लगता है। तलाक की दर शहरों में बढ़ रही है, क्योंकि लोग ज्यादा इंडिपेंडेंट होते हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया कि देर से शादी करने वाले जोड़ों में तलाक 20% ज्यादा हो सकता है।
ग्रामीण भारत में यह प्रथा अभी कम है, लेकिन शहरों में तेजी से फैल रही है।
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निष्कर्ष: संतुलन जरूरी है
देर से शादी के लाभ ज्यादा हैं – व्यक्तिगत विकास, आर्थिक मजबूती, परिपक्वता, बेहतर स्वास्थ्य प्लानिंग, महिलाओं का सशक्तिकरण। लेकिन हानियाँ भी कम नहीं – फर्टिलिटी समस्या, सामाजिक दबाव, अकेलापन, स्वास्थ्य जोखिम।
शादी की उम्र व्यक्ति पर निर्भर करती है। अगर करियर और पढ़ाई महत्वपूर्ण है, तो देर से ठीक है। लेकिन अगर परिवार चाहता है या जैविक घड़ी टिक-टिक कर रही है, तो 25-28 साल के बीच संतुलन बनाएँ।
सरकार को जागरूकता फैलानी चाहिए। स्कूलों में सेक्स एजुकेशन, फर्टिलिटी अवेयरनेस। माता-पिता को समझना चाहिए कि बच्चे की खुशी महत्वपूर्ण है, उम्र नहीं।
यह प्रथा आधुनिक भारत का हिस्सा है। अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो समाज मजबूत बनेगा। लेकिन अगर सिर्फ ट्रेंड के चक्कर में, तो समस्या बढ़ेगी।
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