झुंझुनू के डॉ. घासीराम वर्मा, जिन्हें 'करोड़पति फकीर' कहा जाता है। 93 वर्षीय गणितज्ञ जो अपनी सारी कमाई बालिका शिक्षा पर खर्च करते हैं। पढ़ें इनकी कहानी।
झुंझुनू के 'करोड़पति फकीर': डॉ. घासीराम वर्मा – 93 साल के गणितज्ञ जो अपनी पूरी कमाई बेटियों की शिक्षा पर लुटा देते हैं
मिलिए झुंझुनू के डॉ. घासीराम वर्मा से, जिन्हें 'करोड़पति फकीर' कहा जाता है। अमेरिका में प्रोफेसर, लेकिन भारत में बालिका शिक्षा पर अब तक 10 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। पढ़ें उनकी प्रेरणादायक कहानी। #IncredibleIndia #GoodNews #Motivation #PositiveVibes #Humanity #Respect #IndianIcons #UnsungHero #ViralStory
परिचय: कौन हैं 'करोड़पति फकीर' डॉ. घासीराम वर्मा?
राजस्थान के झुंझुनू जिले के गाँव सीगड़ी की मिट्टी में जन्मे डॉ. घासीराम वर्मा (Dr. Ghasi Ram Verma) एक ऐसा नाम हैं, जो सादगी और दानवीरता की मिसाल हैं। 93 वर्ष की उम्र में जहाँ लोग आराम करते हैं, डॉ. वर्मा अमेरिका के रोडे आईलैंड विश्वविद्यालय (University of Rhode Island) में आज भी गेस्ट प्रोफेसर के रूप में पढ़ाते हैं।
उन्हें लोग प्यार और सम्मान से 'करोड़पति फकीर' कहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे अमेरिका में लाखों कमाते हैं, लेकिन खुद फकीरों जैसा जीवन जीते हैं और अपनी सारी कमाई (अब तक करीब 10 करोड़ रुपये) भारत में बालिका शिक्षा (Girl Child Education) के लिए दान कर देते हैं।
हालिया घटनाक्रम: जीवनसंगिनी का बिछड़ना
वर्तमान में डॉ. घासीराम वर्मा चर्चा में हैं क्योंकि हाल ही में (2 दिन पूर्व) उनकी धर्मपत्नी रुक्मणि देवी का देहांत हुआ है। इस दुख की घड़ी में भी डॉ. वर्मा का नजरिया उनके व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है। पत्नी के निधन पर उन्होंने कहा:
"मुझे खुशी है कि रुक्मणि मेरे से पहले चली गयी।" (उनका आशय यह था कि उनके जाने के बाद पत्नी को अकेलेपन का दुख न सहना पड़े)।
बचपन और संघर्ष: अभावों से अमेरिका तक का सफर
डॉ. वर्मा का जीवन आसान नहीं था। उनका बचपन घोर अभावों में बीता।
शिक्षा के लिए संघर्ष: पढ़ाई के दौरान वे पैसे-पैसे के लिए मोहताज रहे।
हिम्मत और जज्बा: तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और गणित (Mathematics) विषय में पी.एच.डी. (Ph.D.) हासिल की।
सफलता: अपनी मेहनत के दम पर वे अमेरिका पहुँचे और रोडे आईलैंड विश्वविद्यालय, किग्स्टन में प्रोफेसर के पद तक का सफर तय किया।
दानवीरता: 10 करोड़ का दान और वापसी के लिए उधार का किराया
डॉ. वर्मा की कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनकी दानशीलता है।
सालाना 50 लाख का दान: वे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन और निवेश से हर साल लगभग 68 लाख रुपये कमाते हैं। इसमें से 50 लाख रुपये वे भारत आकर बालिका शिक्षा पर खर्च कर देते हैं।
कुल दान: अब तक वे 4 करोड़ रुपये नकद और कुल मिलाकर 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि समाज सेवा में लगा चुके हैं।
वापसी टिकट के पैसे नहीं बचते: कई बार वे अपनी सारी रकम दान करके इतना खाली हो जाते हैं कि अमेरिका वापस जाने के लिए उन्हें मित्रों से हवाई जहाज के टिकट का किराया उधार माँगना पड़ता है। फिर अमेरिका जाकर कमाते हैं और उधार चुकाते हैं।
शिक्षा और समाज सेवा के लिए विजन
डॉ. घासीराम वर्मा का स्पष्ट मानना है कि किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत मदद देने के बजाय संस्थागत मदद दी जाए।
बालिका छात्रावास: उन्होंने राजस्थान में कई बालिका छात्रावासों (Girls Hostels) का निर्माण करवाया है।
प्रतिभाओं को संबल: गरीब और होनहार विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए वे हमेशा तत्पर रहते हैं।
हिन्दी प्रेम: अमेरिका में रहने के बावजूद वे हिन्दी भाषा के प्रबल पैरोकार हैं।
सादगी की मिसाल: राज्यसभा और पद्मश्री को ठुकराया
डॉ. वर्मा को प्रचार और प्रशंसा से कोई मोह नहीं है। उनकी सादगी के किस्से हैरान करने वाले हैं:
राजनीति से दूरी: उन्हें राज्यसभा में जाने का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया।
पुरस्कार की चाह नहीं: लोगों ने उनसे पद्मश्री (Padma Shri) के लिए आवेदन करने को कहा, लेकिन उन्होंने आवेदन करने से भी मना कर दिया।
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निष्कर्ष
डॉ. घासीराम वर्मा सही मायनों में एक संत हैं। वे अमेरिका में प्रोफेसर होकर भी दिल से एक भारतीय किसान और फकीर हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि धन का असली उपयोग उसे तिजोरी में जमा करने में नहीं, बल्कि समाज के उत्थान और बेटियों को शिक्षित करने में है। झुंझुनू का यह लाल आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: डॉ. घासीराम वर्मा कौन हैं?
उत्तर: वे झुंझुनू (राजस्थान) के सीगड़ी गाँव में जन्मे एक महान गणितज्ञ और समाजसेवी हैं, जो अमेरिका में प्रोफेसर हैं और अपनी कमाई बालिका शिक्षा पर खर्च करते हैं।
प्रश्न: डॉ. घासीराम वर्मा को 'करोड़पति फकीर' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि वे करोड़ों रुपये कमाने के बावजूद बेहद सादा जीवन जीते हैं और अपनी सारी दौलत समाज सेवा में दान कर देते हैं, यहाँ तक कि कई बार वापसी के टिकट के लिए भी पैसे नहीं बचाते।
प्रश्न: डॉ. घासीराम वर्मा अब तक कितनी राशि दान कर चुके हैं?
उत्तर: वे अब तक लगभग 10 करोड़ रुपये बालिका शिक्षा और छात्रावासों के निर्माण के लिए दान कर चुके हैं।
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