Last Update On: 12 October 2026
दिवाली (दीपावली) भारत के सबसे प्रमुख, लोकप्रिय और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे प्रकाश का पर्व (Festival of Lights) भी कहा जाता है। यह त्योहार हिंदू पंचांग के कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में पड़ती है। ‘दीपावली’ शब्द का अर्थ है दीपों की पंक्ति। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति में दीप जलाने की परंपरा भी दिवाली से जुड़ी है। इस शुभ अवसर पर लोग अपने घरों की सफाई और सजावट करते हैं, रंगोली बनाते हैं, दीपक जलाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं तथा धन-समृद्धि और सुख-शांति की कामना के लिए माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। दिवाली प्रेम, आशा, नई शुरुआत, पारिवारिक एकता और सकारात्मकता का संदेश देती है।
दिवाली गाइड: दीये, रंगोली डिज़ाइन, मिठाइयाँ, उपहार, लक्ष्मी पूजा और समृद्धि के पारंपरिक उपाय
दिवाली (दीपावली) भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे प्रकाश, खुशियों, पारिवारिक एकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस विशेष अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई और सजावट करते हैं, सुंदर रंगोली डिज़ाइन बनाते हैं, मिट्टी के दीये जलाते हैं और परिवार व मित्रों के साथ मिठाइयाँ बाँटते हैं। दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके सुख, शांति, धन-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। इस दिवाली गाइड में आप जानेंगे कि घर को आकर्षक तरीके से कैसे सजाएँ, पारंपरिक दीये और रंगोली कैसे बनाएँ, स्वादिष्ट मिठाइयों की रेसिपी कैसे तैयार करें, परिवार और दोस्तों के लिए उपयुक्त उपहार कैसे चुनें तथा त्योहार को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से कैसे मनाएँ। दिवाली का वास्तविक संदेश अच्छाई की बुराई पर, प्रकाश की अंधकार पर और ज्ञान की अज्ञानता पर विजय है।
दिवाली के पाँच दिनों का महत्व और उत्सव की परंपराएँ
दिवाली का उत्सव पारंपरिक रूप से पाँच दिनों तक मनाया जाता है। प्रत्येक दिन का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। अलग-अलग क्षेत्रों में तिथियों, पूजा-पद्धतियों और रीति-रिवाजों में कुछ भिन्नताएँ भी देखने को मिलती हैं।
1. धनतेरस: धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना
धनतेरस से दिवाली उत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, भगवान कुबेर और कई परंपराओं में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लोग अपनी मान्यताओं के अनुसार सोना, चाँदी, बर्तन या अन्य उपयोगी वस्तुएँ खरीदना शुभ मानते हैं। घर की सफाई करके दीपक जलाना और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करना भी इस दिन की प्रमुख परंपराएँ हैं।
2. नरक चतुर्दशी: छोटी दिवाली और बुराई पर विजय
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर पर विजय की कथा से जुड़ा है। कई क्षेत्रों में सूर्योदय से पहले स्नान करने, दीपक जलाने और घर को सजाने की परंपरा है। यह पर्व नकारात्मकता को दूर करके जीवन में प्रकाश, सकारात्मकता और नई ऊर्जा का स्वागत करने का संदेश देता है।
3. दीपावली: लक्ष्मी-गणेश पूजा और दीपों का उत्सव
दीपावली मुख्य उत्सव का दिन है। इस अवसर पर लोग घरों और आँगन को दीयों, रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और सुंदर रंगोली से सजाते हैं। शाम को शुभ मुहूर्त और पारिवारिक परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा की जाती है। परिवार के सदस्य नए या पारंपरिक कपड़े पहनते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और एक-दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएँ देते हैं। सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल उत्सव के लिए मिट्टी के दीयों तथा कम धुएँ वाले सजावटी विकल्पों को प्राथमिकता देना अच्छा है।
4. गोवर्धन पूजा: प्रकृति, अन्न और कृतज्ञता का पर्व
गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा से संबंधित है। इस दिन कई स्थानों पर गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर पूजा की जाती है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। यह परंपरा प्रकृति, कृषि, पशुधन और जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश देती है। कुछ क्षेत्रों में इसी दिन अन्नकूट या बलिप्रतिपदा से जुड़ी परंपराएँ भी मनाई जाती हैं।
5. भाई दूज: भाई-बहन के प्रेम और रिश्तों का उत्सव
भाई दूज दिवाली उत्सव का अंतिम दिन है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं, उनकी सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं तथा परिवार में प्रेम और खुशहाली का संदेश देती हैं। भाई भी अपनी बहनों के प्रति स्नेह व्यक्त करते हैं और कई परिवारों में उपहारों का आदान-प्रदान होता है। यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने और पारिवारिक संबंधों का सम्मान करने का सुंदर अवसर है।
दिवाली को खास बनाने के आसान तरीके
दिवाली की तैयारियों में घर की सजावट, आकर्षक रंगोली, पारंपरिक मिठाइयाँ, सोच-समझकर चुने गए उपहार और परिवार के साथ समय बिताना शामिल करें। बजट के अनुसार सजावट करें, जरूरतमंदों के साथ मिठाइयाँ या उपयोगी वस्तुएँ साझा करें और ध्वनि तथा वायु प्रदूषण को कम करने का प्रयास करें। सच्ची समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, प्रेम, संतोष, सद्भाव और परिवार की खुशियों में भी होती है।
दिवाली गाइड: दीये, रंगोली डिज़ाइन, मिठाइयों की रेसिपी, उपहार और परिवार के साथ उत्सव
दिवाली (दीपावली) भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, जिसे प्रकाश का पर्व (Festival of Lights) कहा जाता है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। दिवाली का उत्सव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भाईचारे, एकता, खुशहाली और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों को दीयों, रंग-बिरंगी रोशनी और सुंदर रंगोली से सजाते हैं, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं तथा परिवार और मित्रों के साथ मिठाइयाँ बाँटकर खुशियाँ मनाते हैं।
इस दिवाली गाइड में आप सुंदर दीये सजाने के तरीके, आकर्षक रंगोली डिज़ाइन, पारंपरिक मिठाइयों की आसान रेसिपी, बजट के अनुकूल उपहारों के सुझाव, लक्ष्मी पूजा की परंपराएँ और परिवार के साथ दिवाली मनाने के बेहतरीन विचार जान सकते हैं। त्योहार के अवसर पर जरूरतमंदों की मदद करना, अपनों के साथ समय बिताना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी दिवाली की खुशियों को और खास बनाता है। सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से प्रकाश का यह पर्व मनाएँ तथा अपने जीवन में सुख, शांति, सकारात्मकता और समृद्धि का स्वागत करें।
दिवाली त्योहार: शुभ दिवाली, प्रकाश का पर्व और हिंदी में दीपावली का महत्व
शुभ दीपावली! दिवाली हमें सिखाती है कि प्रेम, सद्भाव, सत्य और अच्छाई के प्रकाश से जीवन की नकारात्मकता को दूर किया जा सकता है। यह पर्व विभिन्न समुदायों और संस्कृतियों के लोगों को खुशियाँ बाँटने, रिश्तों को मजबूत बनाने और एक-दूसरे का सम्मान करने की प्रेरणा देता है। आइए, दीप जलाकर, खुशियाँ बाँटकर और अच्छे कार्यों को अपनाकर दिवाली को यादगार बनाएँ।
दिवाली कब है? जानें दीपावली की तिथि, पाँच दिवसीय त्योहार और पूजा का महत्व
दिवाली कब मनाई जाती है? दिवाली (दीपावली) हिंदू पंचांग के कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है। ‘दीपावली’ का अर्थ है दीपों की पंक्ति। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि के लिए माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
दिवाली पाँच दिवसीय त्योहार है, जिसके प्रत्येक दिन का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इन पाँच दिनों में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों में परंपराओं और तिथियों में कुछ अंतर हो सकता है।
दिवाली के पाँच दिनों का महत्व
1. धनतेरस: दिवाली उत्सव का पहला दिन धनतेरस कहलाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की परंपरा है। लोग सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और शुभ वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का शुभ समय
दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त हर वर्ष पंचांग के अनुसार निर्धारित होता है। पूजा का समय स्थान, सूर्योदय-सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के आधार पर अलग हो सकता है। इसलिए लक्ष्मी पूजा का सही मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग या स्थानीय धार्मिक कैलेंडर को देखें।
दीपावली त्योहार की तिथियाँ और कैलेंडर
दिवाली की तिथि हर वर्ष चंद्र पंचांग के अनुसार बदलती है। वर्ष 2026 में भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल और इंडिया पोस्ट की छुट्टियों की सूची में दीपावली की तारीख 8 नवंबर 2026, रविवार दी गई है। धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तिथियाँ अपने क्षेत्र के पंचांग से अवश्य जाँचें, क्योंकि स्थानीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।
दीपावली केवल रोशनी और उत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सद्भाव, आशा, उदारता और नई शुरुआत का संदेश भी देती है। इस अवसर पर पर्यावरण का ध्यान रखें, सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएँ और जरूरतमंद लोगों के साथ खुशियाँ बाँटें।
शुभ दीपावली: दीपावली का अर्थ, महत्व, लक्ष्मी पूजा और प्रकाशोत्सव की परंपराएं
दीवाली या दीपावली भारत के सबसे लोकप्रिय और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। प्रकाश का त्योहार (Festival of Lights) कहलाने वाला यह पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। दीपावली शब्द का अर्थ है दीपों की पंक्ति, जो आशा, सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश देती है। हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीप जलाने की परंपरा दीपावली के उत्सव से विशेष रूप से जुड़ी हुई है।
दीपावली का त्योहार केवल दीपक जलाने और घरों को सजाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार, प्रेम, एकता और खुशियों का उत्सव भी है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, रंग-बिरंगी रंगोली बनाते हैं, दीपक जलाते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और अपनों को शुभ दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं। धन और समृद्धि की कामना के लिए दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दीपावली से जुड़े प्रमुख पर्वों में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। इन परंपराओं का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में देखने को मिलता है।
आज दीपावली, प्रकाशोत्सव और रोशनी का त्योहार भारत के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों में भी उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व हमें अपने जीवन से नकारात्मकता दूर करने, जरूरतमंदों की सहायता करने, आपसी प्रेम बढ़ाने और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आइए, इस दिवाली दीपों की रोशनी, सुंदर रंगोली, स्वादिष्ट मिठाइयों और मंगलमय शुभकामनाओं के साथ खुशियां बांटें तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए सुरक्षित और स्वच्छ दीपावली मनाएं।
दीवाली और लक्ष्मी पूजा क्या है? जानें धार्मिक महत्व और पूजा विधि
दीवाली (दीपावली) प्रकाश, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का प्रमुख त्योहार है। हिंदू परंपरा में इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। परंपरागत रूप से लक्ष्मी-गणेश पूजन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है। कई पंचांगों में प्रदोष काल के दौरान वृषभ लग्न को पूजा के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा का सही मुहूर्त स्थान, तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। भक्त घर की सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश को फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करके सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
दीपावली किस दिन मनाई जाती है?
दीपावली हिंदू चंद्र-सौर पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है। दीपावली का मुख्य पर्व प्रायः पांच दिनों के उत्सव का हिस्सा होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज तक विभिन्न धार्मिक एवं पारिवारिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इन दिनों में धनतेरस, छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी-गणेश पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का विशेष महत्व है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में त्योहार मनाने की परंपराओं में अंतर हो सकता है।
दिवाली की तारीख और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त कैसे जानें?
दीपावली की तारीख और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त हर वर्ष हिंदू पंचांग के आधार पर निर्धारित किया जाता है। पूजा का समय तय करते समय अमावस्या तिथि, सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल और स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख देखकर पूजा का समय निर्धारित नहीं करना चाहिए। अपने शहर के अनुसार किसी विश्वसनीय पंचांग या स्थानीय विद्वान से लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त अवश्य जाँचें।
दीपावली कब मनानी चाहिए? अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का महत्व
परंपरागत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के मुख्य दिन लक्ष्मी पूजा के लिए अमावस्या तिथि के दौरान प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। यदि अमावस्या तिथि दो दिनों तक रहती है या तिथि और प्रदोष काल के संयोग को लेकर अलग-अलग पंचांगों में मतभेद होता है, तो क्षेत्रीय परंपरा और मान्य पंचांग के अनुसार निर्णय लिया जाता है। तिथि की गणना सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय समय के आधार पर बदल सकती है। इसलिए दीपावली मनाने की सही तारीख और लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त जानने के लिए अपने स्थान के अनुसार प्रकाशित पंचांग देखना सबसे उचित है।
दीपावली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
दीपावली को अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक माना जाता है। हिंदू परंपरा में यह भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति से भी जुड़ी है। जैन धर्म में यह भगवान महावीर के निर्वाण से संबंधित है, जबकि सिख परंपरा में यह पर्व बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर लोग घरों और मंदिरों को दीपों से सजाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं, परिवार के साथ समय बिताते हैं और प्रेम, सद्भाव तथा खुशहाली का संदेश फैलाते हैं।
कब करें दीवाली पर लक्ष्मी पूजा?
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मुहूर्त का नाम |
समय |
विशेषता |
महत्व |
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प्रदोष काल |
सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त |
लक्ष्मी पूजन का सबसे उत्तम समय |
स्थिर लग्न होने से पूजा का विशेष महत्व |
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महानिशीथ काल |
मध्य रात्रि के समय आने वाला मुहूर्त |
माता काली के पूजन का विधान |
तांत्रिक पूजा के लिए शुभ समय |
दीपावली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?
1. दीपावली पर देवी लक्ष्मी का पूजन प्रदोष
काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में किया जाना चाहिए। प्रदोष काल के दौरान
स्थिर लग्न में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान जब वृषभ, सिंह,
वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन
किया जाना चाहिए। क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं। मान्यता है कि
अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाये तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती
है। जो कि सभी लिए लाभदायक होता है ।
2. दीपावली त्योहार पर महानिशीथ काल के दौरान भी पूजन का महत्व है लेकिन यह समय तांत्रिक, पंडित और साधकों के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। इस काल में मां काली की पूजा का विधान है। इसके अलावा वे लोग भी इस समय में पूजन कर सकते हैं, जो महानिशिथ काल के बारे में समझ रखते हों। इस समय पूजा बहुत ही सावधानी से करनी चाहिए क्यों कि कभी कभी इसका उल्टा असर भी हो जाता है ।
क्या है दीवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि?
इस त्योहार दीवाली पर लक्ष्मी पूजा का
विशेष विधान है, इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती है, पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं
भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं, इस दौरान जो
घर हर प्रकार से स्वच्छ और प्रकाशवान हो, वहां वे अंश रूप
में ठहर जाती हैं इसलिए दीवाली पर साफ-सफाई करके विधि विधान से पूजन करने से माता
महालक्ष्मी की विशेष कृपा होती है, लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ
कुबेर पूजा भी की जाती है, पूजन के दौरान निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –
1. दीवाली
के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में वातावरण की
शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें, साथ ही
घर के द्वार पर रंगोली और दियों की एक शृंखला बनाएं।
2. पूजा
स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति
रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं, चौकी के पास जल
से भरा एक कलश रखें।
3. माता
लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि
अर्पित करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें।
4. इसके
साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान
विष्णु और कुबेर देव आदि की भी विधि विधान से पूजा करें।
5. महालक्ष्मी
का पूजन पूरे परिवार को एकत्रित होकर करना चाहिए।
6. महालक्ष्मी
पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की भी पूजा
करें।
7. पूजन के बाद श्रद्धा अनुसार ज़रुरतमंद लोगों को मिठाई और दक्षिणा अवश्य दें।
क्या
करें दीवाली पर?
1. सभी लोगों को कार्तिक अमावस्या यानि
दीपावली के दिन प्रात:काल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करना चाहिए,
मान्यता है कि ऐसा करने से धन की हानि नहीं होती है।
2. दीवाली के दिन वृद्धजन और बच्चों को
छोड़कर् अन्य व्यक्तियों को भोजन नहीं करना चाहिए यानी व्रत रहना चाहिए,
शाम को महालक्ष्मी पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
3. दीपावली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप
व भोग अर्पित करें, प्रदोष काल के समय हाथ में उल्का धारण कर पितरों को मार्ग दिखाएं, यहां उल्का से तात्पर्य है कि दीपक जलाकर या अन्य माध्यम से अग्नि की
रोशनी में पितरों को मार्ग दिखायें, ऐसा करने से पूर्वजों की
आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
4. दीवाली त्योहार से पहले मध्य रात्रि को स्त्री-पुरुषों को गीत, भजन और घर में उत्सव मनाना चाहिए, कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में व्याप्त दरिद्रता दूर होती है तथा माँ लक्ष्मी का आगमन होता है ।
क्या है दीवाली की पौराणिक कथा?
आपको बता दें कि हिंदू धर्म में हर त्यौहार से कई धार्मिक मान्यता और
कहानियां जुड़ी हुई हैं, दीवाली को लेकर भी दो अहम
पौराणिक कथाएं प्रचलित है -
1. बताते हैं कि कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान
श्री राम चंद्र जी चौदह वर्ष का वनवास काटकर और लंकापति रावण का नाश करके अयोध्या
लौटे थे, इस दिन भगवान श्री राम चंद्र जी के अयोध्या
आगमन की खुशी पर लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था, तभी
से दीवाली की शुरुआत हुई और बो अभी भी चलती आ रही है ।
2. सूत्रो की माने तो एक अन्य कथा के अनुसार
नरकासुर नामक राक्षस ने अपनी असुर शक्तियों से देवता और साधु-संतों को परेशान कर दिया था, इस राक्षस ने साधु-संतों की 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना
लिया था, नरकासुर के बढ़ते अत्याचारों से परेशान देवता
और साधु-संतों ने भगवान श्री कृष्ण से मदद की गुहार लगाई, इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने
कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवता व संतों को
उसके आतंक से मुक्ति दिलाई, साथ ही 16 हजार स्त्रियों को कैद से मुक्त कराया, इसी
खुशी में दूसरे दिन यानि कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीये
जलाए, तभी से नरक चतुर्दशी और दीपावली का त्यौहार मनाया
जाने लगा जो अभी भी चला आ रहा है ।
इसके अलावा भी दीवाली को लेकर अन्य और भी पौरणिक
कथाएं सुनने को मिलती है -
1. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एक धार्मिक
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था
और इंद्र ने स्वर्ग को सुरक्षित पाकर खुशी से दियों से दीपावली मनाई थी।
2. अन्य कथा के अनुसार इसी दिन समुंद्र
मंथन के दौरान क्षीरसागर से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं और उन्होंने भगवान विष्णु को
पति के रूप में स्वीकार किया था, तभी से देवों ने दिये
जला कर इस त्योहार की शुरुआत की थी ।
क्या है दीवाली का ज्योतिष महत्व?
दीपावली क्यों मनाते है?
इसी प्रकार दीपावली का आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों रूप से विशेष
महत्व है, हिंदू
दर्शन शास्त्र में दीवाली को आध्यात्मिक अंधकार पर आंतरिक प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, असत्य पर सत्य और बुराई पर
अच्छाई का उत्सव कहा गया है, इसी कारण अधिकतर लोग इस
त्योहार को मानते हैं ।
मित्रो, दीपावली, दिवाली या
दीवाली शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिन्दू
त्यौहार है। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है जिसके बारे में हम
ऊपर चर्चा कर चुके हैं ।
दिवाली के बारे में
इस त्योहार के बारे में जानने के लिए स्कूलों में विभिन्न प्रकार के
लेख छात्रों को सिखाये जाते हैं जैसे दीपावली पर निबंध 150 शब्द - दीपावली पर निबंध प्रस्तावना - दीपावली की
परिभाषा - दीपावली पर निबंध - दिवाली पर निबंध - दिवाली एस्से इन हिंदी इत्यादि। इन सब कार्यक्रमों से बच्चों में इस त्योहार के बारे में जानने
की रुचि पैदा होती है। इन सभी लेखों में छात्रों को दीपावली मनाने का कारण, देव दीपावली क्यों मनाई
जाती है, दिवाली के लिए ग्रीटिंग कार्ड एवं दिवाली के लिए मेहंदी डिजाइन आदि के बारें में जानकारी हो जाती है। पढ़ाई
के दौरान बच्चों को यह भी जानकारी हो जाती है कि धनतेरस
को इंग्लिश में क्या कहते हैं?
दीपावली पर शुभकामनाएं – (हैप्पी दिवाली)
मित्रों, आजकल नई टेक्नोलोजी आने पर नए प्रकार के हैप्पी
दिवाली का कार्ड - हैप्पी दिवाली आप सभी को - दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं संदेश - दीपावली
की शुभकामना सन्देश - दीपावली पर ग़ज़ल - दीपावली पर दो शब्द - दीपावली पर सुविचार इत्यादि भेजने का प्रचलन हो गया है ।
Check details for Diwali Greetings
दीपावली की बेहतरीन शायरी
इस त्योहार पर लोग विभिन्न प्रकार के मनोरंजन करने के लिए शुभ दीपावली शायरी - दीपावली शायरी एवं दिवाली फोटो डाउनलोड - हैप्पी
दिवाली फोटो इत्यादि को इन्टरनेट के माध्यम से
प्रयोग करने लगे हैं ।
दिवाली पर कविता
दिवाली को क्या करना चाहिए?
मित्रो, दिवाली पर आप क्या करते हैं? शायद ये सभी
जानते हैं कि दिवाली पर दिवाली की पूजा - दिवाली की आरती की जाती है । दिवाली से पहले दिवाली की रंगोली - हैप्पी दिवाली रंगोली तैयार की जाती है ।
इस दिन अधिकतर लोग दिवाली की कॉमेडी -दीपावली की
शायरी - दीपावली स्टेटस शायरी - दीपावली शायरी डाउनलोड को इन्टरनेट के
माध्यम से खोजते हैं ।
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दीपावली चित्र
जैसा कि अप सभी जानते हैं कि दिवाली एक आकर्षक त्योहार है इस दिन दीपावली का सुंदर चित्र - दीपावली चित्रकला - दिवाली ड्राइंग फोटोज - हैप्पी दिवाली ड्राइंग इत्यादि का सामूहिक
प्रायोजन करते हैं ।
दिवाली का महत्व
जैसा कि आप जानते हैं इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है विभिन्न
प्रकार के प्रायोजन किए जाते हैं जैसे हैप्पी दिवाली का कार्टून, हैप्पी
दिवाली के भजन तथा हैप्पी
दिवाली की कहानी - दीपावली की कहानी बच्चों की जो कि छोटे छोटे बच्चों को बहुत पसंद आती हैं ।
दिवाली के बाद
दिवाली तो सभी मानते हैं परंतु दिवाली के बाद क्या करना चाहिए? यह सभी
लोगों को ज्ञात नहीं होता हैं, क्या अप जानते हैं कि दिवाली के बाद कौन सा त्यौहार आता है? दिवाली
के बाद एकादशी आती है जिसको अन्य प्रकार के त्योहार
मनाने का प्रचलन है । इस दिन गोवर्धन पूजा की जाती है ।
दिवाली से हानि
मित्रो, दिवाली के बाद प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या है, दिवाली के पटाखे बहुत भयंकर प्रदूषण पैदा करते हैं जिसे सभी जानते हैं किन्तु इसे रोकने में असमर्थ हैं, सरकारें भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करतीं हैं क्योंकि कि यह लोगों की भावनाओं से जुड़ा है परंतु हम सब लोगों को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है इस प्रदूषण से हमारे समाज को हर प्रकार से हानि होती है जैसे पैसे की बरबादी, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं समय की बरबादी। जिसके कारण बहुत लोग तो कर्ज में डूब जाते हैं, बहुत लोग जुआ खेलकर स्वयं बर्बाद होते हैं । शायद सभी लोग इस बात से अनभिज्ञ होंगे कि गरीब की दिवाली किस तरह मनाई जाती है, वह बेचारा कर्ज लेकर अपनी परिवार की खुशिओं के लिए दिवाली मनाता है।
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दिवाली का संदेश है कि हमें अंधकार को दूर करने और प्रकाश लाने का प्रयास करना चाहिए। हमें बुराई पर अच्छाई कायम रखनी चाहिए और हमेशा उम्मीद कायम रखनी चाहिए। हमें अपने परिवार और दोस्तों से प्यार करना चाहिए और उनके साथ खुशियाँ साझा करनी चाहिए।
दिवाली एक ऐसा त्योहार
है जो हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह हमें सिखाता है कि हमेशा
उम्मीद रखनी चाहिए और अंधकार में भी प्रकाश देखना चाहिए।
मित्रो, हम आशा करते हैं
कि दीवाली का त्यौहार आपके लिए मंगलमय हो, माता लक्ष्मी की
कृपा आप पर सदैव बनी रहे और आपके जीवन में सुख-समृद्धि व खुशहाली
आए और परिवार एवं देश नई ऊँचाइयाँ छूए ।
दिवाली से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: दिवाली क्यों मनाई जाती है?
दिवाली मुख्य रूप से भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है। यह बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
Q2: साल 2026 में दिवाली कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दिवाली मनाई जाती है। सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त जानने के लिए आप हमारे पंचांग या आधिकारिक अपडेट देख सकते हैं।
Q3: दिवाली का त्योहार कितने दिनों तक चलता है?
दीपावली का पावन पर्व कुल पाँच दिनों तक चलता है, जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज के दिन समाप्त होता है।
Q4: दिवाली के पाँच दिनों के नाम क्या हैं?
दिवाली के पाँच प्रमुख दिन हैं: 1. धनतेरस, 2. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), 3. दीपावली (मुख्य पर्व), 4. गोवर्धन पूजा, और 5. भाई दूज।
Q5: दीपावली पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
दीपावली की मुख्य रात को धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और विद्या की देवी माता सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है।
Q6: धनतेरस के दिन किस बात की पूजा और खरीदारी की जाती है?
धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर, भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन बर्तन, आभूषण, नए बर्तन और दीपावली पूजन सामग्री खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।
Q7: गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर देवराज इंद्र के अहंकार को चूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा करने की स्मृति में पूजा की जाती है।
Q8: भाई दूज का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
भाई दूज भाई-बहन के पवित्र प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुखद भविष्य की कामना करती हैं।
Q9: दिवाली पर घरों में रंगोली क्यों बनाई जाती है?
रंगोली को स्वागत और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि रंगोली बनाने से घर में माता लक्ष्मी का आगमन होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
Q10: इको-फ्रेंडली (पर्यावरण अनुकूल) दिवाली कैसे मनाएं?
कम से कम प्रदूषण फैलाकर, मिट्टी के दीये जलाकर, प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाकर, अधिक आतिशबाजी (पटाखों) से बचकर और जरूरतमंदों के साथ खुशियां बांटकर आप एक पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित दिवाली मना सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
दीपावली सिर्फ दीपों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन से अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और सत्कर्म का प्रकाश फैलाने का संदेश देता है। यह पर्व हमें आपसी भेदभाव भूलाकर प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ जीने की प्रेरणा देता है। आइए, इस पावन पर्व पर हम सब मिलकर संकल्प लें कि अपने जीवन के साथ-साथ दूसरों के जीवन में भी खुशियों के दीप जलाएंगे और एक स्वच्छ, सुरक्षित व समृद्ध समाज का निर्माण करेंगे।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस लेख में दी गई समस्त जानकारी पारंपरिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और सामान्य ज्ञान पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को जानकारी प्रदान करना है। हम किसी भी अंधविश्वास या भ्रामक तथ्यों को बढ़ावा नहीं देते हैं। त्योहारों की सटीक तिथियों, शुभ मुहूर्तों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कृपया अपने स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित/विद्वान से मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करें।
















