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Latest Update On: 28 January 2026
इस वर्ष होली कब है? Holi Date & Time | इस दिन मनाई जाएगी होली 2026
इस वर्ष होली 2026 भारत में 4 मार्च (बुधवार) को मनाई जाएगी। यह रंगों वाली होली (धुलंडी या रंगवाली होली) का मुख्य दिन है, जब लोग एक-दूसरे पर रंग, गुलाल और अबीर डालकर उत्सव मनाते हैं।
होलिका दहन (छोटी होली) 3 मार्च (मंगलवार) की शाम को होगी। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर पड़ती है, और शाम के शुभ मुहूर्त में (आमतौर पर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, जैसे शाम 6:20 बजे से रात 8:50 बजे तक के बीच विभिन्न स्थानों पर) होलिका की पूजा कर आग जलाई जाती है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जहां प्रह्लाद की कथा के अनुसार होलिका जलकर राख हो गई थी।
ध्यान दें: इस साल 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, इसलिए कुछ जगहों पर सूतक काल या विशेष नियम लागू हो सकते हैं। होलिका दहन ग्रहण के बाद या शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। सटीक समय और स्थानीय पंचांग के अनुसार अपने शहर में जांच लें, क्योंकि मुहूर्त थोड़ा अलग-अलग हो सकता है।
होली का त्योहार प्रेम, एकता, वसंत का आगमन और पुरानी शिकायतें माफ करने का प्रतीक है। घरों में गुजिया, ठंडाई, मालपुआ बनते हैं, और लोग खुशी से रंग खेलते हैं। बरसाना, मथुरा-वृंदावन में लट्ठमार और फूलों की होली बहुत प्रसिद्ध है।
हैप्पी होली! रंगों से भरा उत्सव मनाएं, लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य का ध्यान रखें – ऑर्गेनिक कलर्स का इस्तेमाल करें।
Holi Festival: Holi Colours | Holi Celebration
होली कब जलाई
जाएगी?
इस साल होलिका दहन (छोटी होली या होलिका की आग जलाना) 3 मार्च 2026 (मंगलवार) की शाम को होगी। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर पड़ती है, और शाम के शुभ मुहूर्त में (प्रदोष काल में) होलिका दहन किया जाता है।
शुभ मुहूर्त (दिल्ली/उत्तर भारत के अनुसार, IST):
- होलिका दहन का मुख्य समय: शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक (लगभग 2 घंटे 28 मिनट का मुहूर्त)। (सटीक समय आपके शहर के पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या पंडित जी से जरूर जांच लें।)
होलिका दहन क्यों और कैसे? होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्रह्लाद की कथा के अनुसार, होलिका (हिरण्यकशिपु की बहन) प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठी थी, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। इस दिन लोग लकड़ी, गोबर के उपले, सूखी टहनियां आदि से होलिका बनाते हैं, उसकी पूजा करते हैं, और शाम को आग लगाते हैं। इसके बाद लोग होलिका के चारों ओर नाचते-गाते हैं और पुरानी कड़वाहट भूल जाते हैं।
ध्यान देने योग्य बातें:
- इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी।
- भद्रा काल या अन्य अशुभ समय में होलिका दहन नहीं करना चाहिए, इसलिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में ही करना शुभ माना जाता है।
- कुछ जगहों पर चंद्र ग्रहण या अन्य योग के कारण नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने क्षेत्र के अनुसार पुष्टि करें।
अगले दिन रंगवाली होली:
4 मार्च 2026 (बुधवार) को रंगों वाली होली (धुलंडी) मनाई जाएगी, जब लोग रंग, गुलाल, अबीर से खेलते हैं, गुजिया-ठंडाई खाते हैं और खुशियां मनाते हैं।
IMPORTANT
INFORAMTION ABOUT HOLI FESTIVAL - होली से जुड़ी खास जानकारी
PLACES
WHERE HOLI DOES NOT CELEBRATE - यहां नहीं मनाते हैं होली
Holi Date: Holi Color Powder | Organic Holi Colours
जैसा कि आप सभी जानते हैं, हिंदू धर्म में जितने भी त्योहार मनाए जाते हैं, सभी को सौभाग्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। जल्द ही आप सभी
का पसंदीदा त्योहार होली आने वाला है। इस बार 3 और 4 मार्च को देश भर में होली का त्योहार
धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है
और उसके अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है।
इस साल 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और 4 मार्च को अबीर-गुलाल से होली खेली जाएगी। सभी देश वासी अपने अपने हिसाब से होली का त्योहार मनाएंगे, किन्तु पिछली वर्ष कोरोनावाइरस फैलने के
कारण होली का रंग हल्का रह सकता है, सभी लोगों को इस बीमारी से बचने के उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता
है विश्व स्वास्थय संगठन ने इसके बारे में अपनी बेबसाइट पर आवश्यक विवरण दे रखे
हैं। सभी लोग कोरोना का वचाव करते हुये होली का उत्सव मनाएँ ।
होली कब है? Happy Holi | Holi
Kab Hai | Holi Festival | Holi Wishes | Happy Holi Wishes
मित्रो होली का पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की
पूर्णिमा को मनाया जाता है, होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है, यह
भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर
में मनाया जाने लगा है, होली रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला
यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है।
Holi
Color Festival: बेहद खास है भारत के इन चार शहरों की
होली
जैसा
कि हम सभी जानते हैं कि त्योहारों पर लोग ज्यादातर अपने घर और परिवार के साथ
बिताना पसंद करते हैं। हांलाकि कुछ
लोग ऐसे भी हैं जो एडवेंचर की चाह में कुछ नया करना, देखना
चाहते हैं। होली का खास त्योहार भारत देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। हर
शहर में इसे मनाने का अलग ही अंदाज होता है। अगर आपको होली के रंग देखने हैं तो
मथुरा के साथ ही इन जगहों की भी सैर शानदार होगी। आगे जानिए भारत के किन चार शहरों
की होली बेहद खास है -
1- मथुरा-वृंदावन की होली
2- उदयपुर की शाही होली
3- आनंदपुर साहिब की होली
इस बार आप पंजाबी तरीके से होली का लुत्फ उठाने के लिए आनंदपुर
साहिब जरूर पहुंचें। होली में पंजाब का रंग एकदम अलग होता है। आनंदपुर साहिब में
खेली जाने वाली होली की शुरुआत सन 1701 में होला-मोहल्ला त्योहार के रूप में हुई थी। इस त्योहार में सिख
समुदाय के लोग कुश्ती, मार्शल आर्ट्स और तलवारों के
साथ कई करतब दिखाते हैं। जिसका आप अपनी आँखों से अवलोकन कर सकते हैं।
4- जयपुर की होली
देश की परम्पराओं और त्योहार को डूबकर जीने वाले लोग ही गुलाबी
नगरी की पहचान हैं। बाहर से आने वाले लोगों पर भी त्योहार का रंग ऐसा चढ़ता है कि
वे भी यहां की संस्कृति और सभ्यता में रंग जाते हैं। होली पर शहर भर में कई आयोजन
होते हैं। सिटी पैलेस के होली दहन से लेकर
पारम्परिक लोक नाट्य तमाशा और गुलाल गोटे का इतिहास बहुत पुराना है। इसके अलावा
ताडक़ेश्वर महादेव मंदिर के बाहर शिव भक्ति में झूमते लोग भी आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। इस बार आप गुलाबीनगर
की होली देखना चाहते है तो चूके नहीं। जो अब तक नहीं देखा, उसे इस बार जरूर देखकर जाएं।
जयपुर की पीढिय़ां बदलीं, मान्यता वही है –
जयपुर के परकोटा में होलिका दहन की शुरुआत सिटी पैलेस से होती है।
पीढिय़ा बदल गईं, लेकिन मान्यता आज भी वही है। यहां परकोटा के मोहल्लों से लोग एकत्रित
होते हैं। पूर्व राजपरिवार के सदस्य पूजा-पाठ करने के बाद होलिका दहन करते हैं।
इसके बाद से यहां मौजूद लोग उस आग में डंडा जलाकर भागते हैं। ये लोग अपने मोहल्ले
में रखी होली में आग लगाते हैं। यह दृश्य सालों से ऐसा ही चला आ रहा है, जिसे आज भी लोग बखूबी मानते हैं।
Holi Colour: क्यों नहीं खेलते यहां लोग होली? यहाँ
है केवल महिलाओं को होली खेलने की इजाजत
होली का त्योहार आने में अब कुछ ही समय शेष रह गया है, स्वाभाविक है कि पूरे
देश में इस पर्व को लेकर खूब हर्ष और उल्लास का माहौल है। हो भी क्यों न होली का
त्योहार रंगों का त्योहार जो होता है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक
है लोग इसे लेकर उत्साहित रहते हैं। हालांकि जहां होली को लेकर जगह-जगह तैयारियां जोरों
से चल रही हैं, वहीं भारत में ही कुछ ऐसे स्थान भी
हैं जहां यह त्योहार नहीं मनाया जाता है। जी हां, संभव
है कि यह बात सुनकर आपको अटपटा जरूर लगे लेकिन यह सत्य है और हैरत की बात यह है कि
होली न मनाने के पीछे कारण भी बहुत ही अजीबोगरीब हैं तो चलिए जानते हैं कि कौन सी जगह हैं
जहां किसी न किसी कारणवश होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। यहाँ हम आपके लिए यह आवश्यक जानकारी साझा कर रहे हैं -
क्यों यहां 102 साल से नहीं मनाई गई होली?
हमारे देश के झारखंड प्रदेश के बोकारो के कसमार ब्लॉक स्थित दुर्गापुर गांव में 103 साल से होली नहीं खेली गई। यहां के लोग होली पर एक-दूसरे को रंग नहीं
लगाते, क्योंकि उन्हें डर है कि ऐसा करने से गांव
में महामारी और आपदा आएगी। दरअसल एक दशक पहले एक राजा के बेटे की होली के दिन मौत
हो गई थी। इसके बाद जब भी गांव में होली का आयोजन होता था, गांव में महामारी फैल जाती थी और कई लोगों की मौत हो जाती थी। उसके बाद
राजा ने आदेश दिया कि आज
से यहां होली नहीं मनाई जाएगी। और तभी से इस गाँव
में होली नहीं मनाई जाती है।
होली न खेलना इस कारण बनी धार्मिक मान्यता -
मध्य प्रदेश के
बैतूल जिले की मुलताई तहसील के डहुआ गांव में 132 साल से होली मनाने पर प्रतिबंध है। दरअसल
यहां के लोगों की माने तो,
कि लगभग 132 साल पहले इस
गांव में होली के त्योहार वाले दिन गांव के मुखिया की बावड़ी में डूबने के कारण
मौत हो गई थी। मुखिया की मौत से गांव वाले बहुत दुखी हुए और उनमें भय समा गया इस
घटना के बाद गांव के लोगों ने होली न मनाने का फैसला लिया। अब यहां होली नहीं
खेलना धार्मिक मान्यता बन चुकी है। और लोग इसे निभा रहे हैं।
एसे खोटा हो गया होली का त्योहार इस जगह -
होली न मनाने के पीछे है खास वजह इन 2 गांवों में –
देश के राज्य छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से 35 किमी दूरी पर खरहरी नाम के एक गांव में लगभग 156 साल से होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं
कि 154 साल पहले यहां भीषण आग लगी थी, जिसके कारण गांव के हालात बेकाबू हो गए थे। आग लगने के बाद पूरे गांव
में महामारी फैल गई। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस त्रासदी से छुटकारा पाने के
लिए एक हकीम को देवी ने स्वपन में दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि गांव में होली का
पर्व ना मनाया जाए तो यहां शांति वापस आ सकती है। तब से ही यहां होली का त्योहार
नहीं मनाया जाता है।
दूसरा, छत्तीसगढ़ के ही धमनागुड़ी गांव में भी
पिछले 207 सालों से होली का त्योहार नहीं मनाया
जाता है। इस गांव के लोग होली जलाने और गुलाल रंग से काफी दूर रहते हैं। दैवीय खौफ
की वजह से यहां के लोग करीब दो सौ सालों से होली नहीं मनाते हैं। इन दोनों गांव के
लोग होली के रंग और गुलाल से इतना डरते हैं कि होली के दिन अपने घर से भी बाहर
निकलने से भी कतराते हैं। इस प्रकार ये लोग आज के
समय में भी पुरानी कुरीतियों में जकड़े हैं ।
केवल महिलाएं ही खेलती हैं होली यहाँ -
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राज्य उत्तर प्रदेश के कुंडरा गांव में होली
के त्योहार पर केवल महिलाओं को ही रंगों और गुलालों से होली खेलने की इजाजत है। इस दिन पुरुष खेतों पर
चले जाते हैं ताकि महिलाएं आराम से होली का आनंद लें। इस दिन महिलाएं राम जानकी
मंदिर में एकत्र होकर जमकर होली खेलती हैं लेकिन लड़कियों, पुरुषों और बच्चों तक को होली खेलने की इजाजत नहीं होती है। दरअसल इसके
पीछे एक कहानी यह है कि यहां होली के दिन मेमार सिंह नाम के एक डकैत ने एक ग्रामीण
की हत्या कर दी थी। उस समय से लोगों ने होली खेलना बंद कर दिया था। बाद में
महिलाओं को होली खेलने की इजाजत मिल गई। तभी केवल
महिलाएं ही यहाँ होली खेलती हैं।
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निष्कर्ष
होली 2026 का यह रंगीन उत्सव 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगवाली होली के साथ पूरे जोश के साथ मनाया जाएगा। यह त्योहार न केवल रंगों का उत्सव है, बल्कि प्रेम, एकता, भाईचारे और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। होलिका दहन के शुभ मुहूर्त में आग जलाकर पुरानी कड़वाहट भूलें और अगले दिन रंग-गुलाल से खेलकर नए रिश्तों की शुरुआत करें। गुजिया, ठंडाई और मालपुए के साथ परिवार-दोस्तों के साथ खुशियां बांटें, ऑर्गेनिक कलर्स का इस्तेमाल करें और पर्यावरण का ध्यान रखें। आइए इस होली को यादगार बनाएं – हैप्पी होली 2026! 🌈🙏
रंगों से भरा जीवन हो, हर दिल में खुशी छा जाए!
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