बरसाना की विश्व प्रसिद्ध Lathmar Holi के बारे में सब कुछ जानें। Explore the history, tradition, and details of Barsana Rangili Holi in Hindi. जानिए कैसे मनाया जाता है लठमार होली का यह महापर्व और क्या है इसकी विशेषता। Experience the divine energy of Radha-Krishna's land this festive season!
Latest Update On: 1 February 2026
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Experience the Magic of Barsana Rangili Holi and Lathmar Holi
Traditions
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना अपनी अनोखी Lathmar Holi के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह पावन पर्व राधा-कृष्ण के प्रेम और उनकी चुलबुली नोक-झोंक का प्रतीक है, जहाँ नंदगाँव के हुरियारे (पुरुष) बरसाना की हुरियारिनों (महिलाओं) के साथ होली खेलने आते हैं। इस परंपरा में महिलाएँ लाठियों से पुरुषों पर प्रहार करती हैं और पुरुष ढाल (Shields) से अपना बचाव करते हैं। Barsana Rangili Holi के दौरान पूरा ब्रज 'राधे-राधे' के जयकारों, ढोल की थाप और अबीर-गुलाल के बादलों से सराबोर हो जाता है। अगर आप भी ब्रज की इस प्राचीन संस्कृति, लोक गीतों और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करना चाहते हैं, तो बरसाना की लठमार होली का हिस्सा जरूर बनें।
Brij Holi Schedule: Experience the Magic of Vrindavan and Barsana Holi
ब्रज की होली पूरी दुनिया में अपनी अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें Barsana Rangili Holi और Lathmar Holi का विशेष महत्व है। अगर आप Vrindavan mein Holi मनाने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको यहाँ के विस्तृत Brij Holi Schedule की जानकारी जरूर होनी चाहिए। मथुरा, वृंदावन और बरसाना में होली का उत्सव कई दिनों तक चलता है, जहाँ आप नंदगाँव की लठमार होली, बांके बिहारी मंदिर की फूलों वाली होली और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद ले सकते हैं। इस Holi festival guide के माध्यम से आप ब्रज की प्राचीन परंपराओं, लोक गीतों और आध्यात्मिक ऊर्जा को करीब से देख सकते हैं। बरसाना की गलियों से लेकर वृंदावन के मंदिरों तक, रंगों का यह महापर्व हर श्रद्धालु और पर्यटक के लिए एक यादगार अनुभव साबित होता है।
लट्ठमार होली नारी
सशक्तिकरण का प्रतीक है यहां की होली, यहाँ झलकता है राधा-कृष्ण का प्रेम
सारी
दुनिया से अलग ब्रज की लट्ठमार होली सिर्फ मौज मस्ती की नहीं बल्कि नारी
सश्क्तिकरण का प्रतीक माना जाता है। इसके
बारे में यहाँ कुछ विवरण दिया जा रहा है -
नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है ब्रज की होली
Holi Special: विश्व प्रसिद्ध ब्रज की होली | Braj ki Lathmaar Holi
Colorful Indian Festival Holi: ब्रज बरसाना की लठमार होली देखें -
नंदगांव और बरसाने के बीच खेली जाती है लट्ठमार होली
Holi Latest Special: कान्हा की नगरी Mathura Barsane की लठमार होली | देखे वीडियो
होली खेलने का न्यौता लेकर जाती हैं सखियां
लड्डू होली, बरसाना: LADDU HOLI BARSANA Viral
लट्ठमार
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होली Latest:
Holi Song Play List
अभी से होली के लिए तैयार कर लें गानों की ये प्ले लिस्ट
होली या फाग गायक ढोल, मंजीरे की थाप पर जब सुर लगाते
हैं तो लोगों पर होली का खुमार सिर चढ़कर बोलता है।
होली फाग महोत्सव - Holi Faag Mahotsav
होली का त्योहार आने ही वाला है, लोगों ने अभी से होलिका दहन के लिए पवित्र लकड़ियां इक्कठी करनी शुरू कर
दी हैं, चंदे वालों ने भी होली का जश्न मनाने के लिए
अभी से चंदा मांगना शुरू कर दिया है, होली आने से
पहले या यूं कहें कि बसंत का मौसम शुरू होने के साथ ही कुछ आंचलिक भू-भागों में
फाग गायन शुरू भी हो
जाता है, फाग दरअसल, होली
और इस मौसम से जुड़े लोगगीत होते हैं, स्थानीय लोग इन
गीतों को जश्न और ख़ुशी जाहिर करने के तौर पर गाते हैं, फाग गाने की परंपरा काफी लंबे समय से चली आ रही है, अगर देखा जाए तो होली पर फाग गाने से जश्न का मजा और भी ज्यादा बढ़ जाता
है, फाग उत्तर प्रदेश के आसपास के इलाकों, बुंदेलखंड और बिहार में मुख्य रूप से गाए जाते हैं। ब्रिज क्षेत्र में होली के रसिया बहुत प्रसिद्ध हैं जिन्हें लोग कई दिन
पहले से गाना शुरू कर देते हैं। हम यहाँ पर आपके लिए
बहुत से गानों के वीडियो लेकर आए हैं जिन्हें देखकर और सुन कर आप भी होली का आनंद
ले सकते हैं ....
4-आज ब्रज में होली रे रसिया....
9-मैं कैसे होली खेलूँगी, या सांवरिया के संग...
होली या फाग गायक ढोल, मंजीरे की थाप पर जब सुर लगाते हैं तो लोगों पर होली का खुमार
सिर चढ़कर बोलता है, होली फाग के जरिए लोग प्रकृति को धन्यवाद करते हैं, होली का जश्न मनाते हैं और राधा
कृष्ण के भजन गाते हैं, इस फाग गीतों में ब्रज और मथुरा की होली राधा और कृष्ण की
लीलाओं का बखान होता है, होली फाग शास्त्रीय संगीत की श्रेणी में आता है, बिहार और इसके आसपास के इलाकों
में फाग को फगुआ भी कहा जाता है, अगर आप ने भी अभी से होली की तैयारियां शुरू कर दी हैं तो आप इन
होली फाग गीतों को अपनी प्ले लिस्ट में शामिल कर सकते हैं और साथ ही इन गीतों का आनंद ले सकते हैं ....
होरी खेलन आयो नटवर नन्द किशोर ....
ब्रज की बहुत ही प्यारी होली पहले कभी नहीं सुनी होगी | Harshit Saini | Radha Krishan Holi Viral
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रंग मत डारो रे सांवरिया...
रंग मत डाले रे साँवरिया | ब्रज की धमाल: Rang Mat Dare Re Sanwariya
होली आई रे कान्हा, ब्रज
के रसिया...
होरी आई रे कान्हा: Hori aayi re kanha | vraj ke rasiya | Hori Aayi re Kanha
मैं कैसे होली खेलूँगी, या
सांवरिया के संग...
मोहे होली में कर गयो तंग | Popular Holi Song Viral
फाग खेलन कृष्ण ब्रज आए रे...
फाग खेलन बरसाने आए हैं: Faga Khelan
Barsane Aaye Hai
धार्मिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण महिला शक्ति का सम्मान करते थे और बुरे वक्त में
सदैव उनके साथ खड़े होते थे, लट्ठमार होली श्रीकृष्ण के
उसी संदेश को नटखट अंदाज में प्रदर्शित करती है, लट्ठमार होली में महिलाएं
अपनी ताकत का प्रदर्शन करती हैं, मथुरा और बरसाना की लट्ठमार
होली में आज भी राधा-कृष्ण की अनोखी विरासत सिमटी हुई है, जिसे देखने के लिए सुदूर से लोग यहाँ आते हैं।
मथुरा क्षेत्र में राधा-कृष्ण की परंपरा को अपनाते हुए आज भी फाल्गुन मास की सप्तमी को राधा
रानी के गांव बरसाने से सखियां फाग खेलने का न्यौता लेकर नंदगांव जाती हैं, न्यौता पहुंचने के बाद हुरियार ढाल लेकर होली खेलने के लिए बरसाने पहुंचते
हैं, वहीं, दूसरी तरफ बरसाने
की महिलाएं रंग, लट्ठ लेकर होली खेलने की तैयारी करती
हैं, नंदगांव की टोलियां जैसी ही बरसाने पहुंचती हैं
महिलाएं उन पर लाठियां बरसाना शुरू कर देती हैं, बरसाने
और नंदगांव दोनों ही तरफ के लोगों को आज भी इस बात का विश्वास है कि लट्ठमार होली
में किसी को भी चोट नहीं पहुंचती है, बरसाने की होली
में शामिल होने के बाद हर कोई श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम में रंग जाता है, यह है लट्ठमार होली का प्रचलन।
ब्रज होली यात्रा गाइड: सुखद और सुरक्षित अनुभव के लिए जरूरी टिप्स
ब्रज की होली का अनुभव जितना दिव्य होता है, वहां की भीड़ और उत्साह को संभालना उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अपनी Barsana and Vrindavan Holi यात्रा को यादगार और सुरक्षित बनाने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें:
पुराने और सूती कपड़े पहनें: होली खेलने के लिए हमेशा पुराने और आरामदायक सूती (Cotton) कपड़े चुनें, जिन्हें रंग लगने के बाद आसानी से बदला जा सके।
त्वचा और बालों की सुरक्षा: घर से निकलने से पहले बालों और त्वचा पर नारियल या सरसों का तेल अच्छी तरह लगा लें, ताकि पक्के रंगों का असर कम हो और वे आसानी से निकल जाएं।
भीड़भाड़ से सावधान: लठमार होली और बांके बिहारी मंदिर में भारी भीड़ होती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें और कीमती सामान जैसे गहने या ज्यादा कैश साथ न रखें।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का बचाव: अपने मोबाइल फोन और कैमरे को वाटरप्रूफ पाउच या प्लास्टिक बैग में रखें ताकि पानी और गुलाल से नुकसान न हो।
प्राकृतिक रंगों का उपयोग: अपनी और दूसरों की आंखों व स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए केवल प्राकृतिक और हर्बल रंगों (Gulaal) का ही प्रयोग करें।
जल्द पहुँचें: प्रमुख आयोजनों (जैसे लठमार होली) को करीब से देखने के लिए कार्यक्रम शुरू होने से कम से कम 2-3 घंटे पहले स्थान पर पहुँचने की कोशिश करें।
निष्कर्ष: ब्रज की दिव्य और भव्य होली का अनुभव
ब्रजमंडल की होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और प्रेम का एक अनूठा संगम है। Barsana Rangili Holi की परंपराओं से लेकर Vrindavan mein Holi की मस्ती तक, ब्रज का हर कोना इस दौरान राधा-कृष्ण के प्रेम के रंग में रंगा नजर आता है। इस Brij Holi Schedule and Festival Guide के माध्यम से हमने आपको Lathmar Holi और यहाँ के सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी है। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपकी यात्रा को सुगम और यादगार बनाने में मददगार साबित होगी। चाहे आप Barsane ki Lathmar Holi की वीरता देखना चाहते हों या वृंदावन की गलियों में उड़ते गुलाल का आनंद लेना चाहते हों, ब्रज की यह यात्रा आपके जीवन के सबसे रंगीन अनुभवों में से एक होगी। 'राधे-राधे' के जयकारों के साथ इस पावन पर्व का आनंद लें और ब्रज की इस दिव्य होली का हिस्सा बनें!


